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Hindi Essays Environmental Pollution

भारत में प्रदूषण एक बड़ी पर्यावरणीय मुद्दा है जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए । हमारे बच्चो और कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 व 12 विद्यार्थियों को आम तौर पे स्कूल में प्रदुषण पे निबंध लिखने को दिया जाता है। माता पिता को प्रदुषण के प्रकार, कारण और रोकथाम के बारे में पता होना चाहिए ताकि वो अपने बच्चो को इसके बारे में बता सके|

वायु प्रदूषण पर निबंध | जल प्रदूषण पर निबंध | मृदा प्रदूषण पर निबंध | ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण पर निबंध (पोल्लुशन एस्से)

You can find here some essays on Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 300, 350 and 450 words.

प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द)

प्रदूषण प्राकृतिक वातावरण को दूषित करता है जो की हमारे सामान्य जीवन के लिए महत्वूर्ण है| किसी भी प्रकार का प्रदुषण हमारे प्राकृतिक वातावरण और इकोसिस्टम में अस्थिरता, स्वास्थ्य विकार और सामान्य जीवन में असुविधा उत्पन्न करता है| यह प्राकृतिक व्यवस्था को अव्यवस्थित कर देता है और प्रकृति के संतुलन को बिगड़ देता है|

प्रदूषक या प्रदुषण के तत्त्व मनुष्यों द्वाया उत्पन्न किया गया वाह्य पदार्थ या वेस्ट मटेरियल होता है जो की प्राकृतिक संसाधन जैसे की वायु, जल और भूमि आदि को प्रदूषित करते है| प्रदूषक का रासायनिक प्रकृति, सांद्रता और लम्बी आयु इकोसिस्टम को लगातार कई वर्षो से असंतुलित कर रहा है। प्रदूषक जहरीली गैस, कीटनाशक, शाकनाशी, कवकनाशी, ध्वनि, कार्बनिक मिश्रण, रेडियोधर्मी पदार्थ हो सकते है|

प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द)

प्रदूषण पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों में कुछ हानिकारक या जहरीले पदार्थ का मिश्रण है। यह इस ग्रह पर रहने वाले जीवों की साधारण जीवन को प्रभावित करता है और प्राकृतिक जीवन चक्र को छति पहुँचाता है। वायु प्रदुषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है जिसका मुख्य कारण है बढ़ रही ऑटोमोबाइल की संख्या, ज़हरीली गैसों का रिलीज़, औद्योगिक कंपनियों का धुआं, फाइनली डिसॉल्वड सॉलिड्स और तरल एयरोसौल्ज़ इत्यादि का वातावरण में होना। जिस हवा में हरपल हम साँस लेते है वो हमारे फेफड़ों संबंधी विकार का कारण बनती है।

इस प्रकार भू प्रदुषण और जल प्रदुषण भी विभिन्न कारणों से होता है जैसे की पीने के पानी में सीवेज के पानी (जीवाणु, वायरस व हानिकारक रसायन ग्रसित) का मिश्रण, कुछ खतरनाक एग्रोकेमिकल्स जैसे की कीटनाशक, शाकनाशी, कवकनाशी, ईथर बेंजीन जैसे कार्बनिक मिश्रण, रेडियम और थोरियम सहित कुछ रेडियोधर्मी पदार्थ, ठोस वेस्ट (औद्योगिक राख, कचरा, मलबा) इत्यादि| हमें इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए सरकार द्वारा लागू सभी नियंत्रण के उपायों का पालन करना चाहिए|

प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द)

प्रदुषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है क्योकि यह हर आयु वर्ग के लोगों और जानवरों के लिए स्वास्थ्य का खतरा है। हाल के वर्षों में प्रदूषण की दर बहोत तेजी से बढ़ रही है क्योकि औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ सीधे मिट्टी, हवा और पानी में मिश्रित हो रहीं हैं। हालांकि हमारे देश में इसे नियंत्रित करने के लिए पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहोत ज्यादा भुगतेगी।

प्रदूषण प्राकृतिक संसाधनों के प्रभाव के अनुसार कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जैसे की वायु प्रदूषण, भू प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि| प्रदूषण की दर इंसान के अधिक पैसे कमाने के स्वार्थ और कुछ अनावश्यक इच्छाओं को पूरा करने की वजह से बढ़ रही है। आधुनिक युग में जहाँ तकनीकी उन्नति को अधिक प्राथमिकता दी जाती है वहां हर व्यक्ति जीवन का असली अनुशासन भूल गया है।

लगातार और अनावश्यक वनो की कटौती, शहरीकरण, औद्योगीकरण के माध्यम से ज्यादा उत्पादन, प्रदूषण का बड़ा कारण बन गया है। इस तरह की गतिविधियों से उत्पन्न हुआ हानिकारक और विषैले कचरा, मिट्टी, हवा और पानी के लिए अपरिवर्तनीय परिवर्तन का कारण बनता है जोकि अंततः हमें दुःख की ओर अग्रसर करता है| यह बड़े सामाजिक मुद्दे को जड़ से खत्म करने और इससे निजात पाने के लिए सार्वजनिक स्तर पर सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता है।


 

प्रदूषण पर निबंध 4 (300 शब्द)

प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना। तदनुसार प्राकृतिक संसाधनों का प्रदूषण, पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन का कारण बनता है। वर्तमान में हम प्राणघातक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं। प्रदूषण, क़ुदरती प्राकृतिक पर्यावरण की तुलना में बहुत तेज दर से पर्यावरण में किसी भी वाह्य या जहरीले पदार्थ का मिश्रण होता है| इस शैतानीय सामाजिक समस्या के मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण, वनों की कटाई और शहरीकरण, प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उपोत्पाद जो की सामान्य जीवन की दिनचर्या के रूप इस्तेमाल की जाती है|

वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भू प्रदूषण सबसे खतरनाक प्रदुषण के प्रकार है जो की मानव जाति के लिए प्रतच्छ स्वास्थ विकार है| हमारे पास पिने के लिए स्वच्छ पानी, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा, और फसल उगाने ने लिए प्रदुषण रहित भूमि नहीं है। भविष्य में इस ग्रह पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए इस व्यापक रूप से फैल रहे प्रदूषण को नियंत्रित करना पड़ेगा। विभिन्न प्रकार के प्रदूषक जो की हमारे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बिगड़ रहे हैं वे हैं गैस (NO, SO2, CO2, CO, NO2), हैलोजन (आयोडीन, क्लोरीन, ब्रोमीन), जमा पदार्थ (धूल, धुंध, कंकरी), एग्रोकेमिकल्स (इंसेक्टिसाइड, कीटनाशक, शाकनाशी), शोर, फोटोकेमिकल ओक्सिदेंट्स (फोटोकेमिकल स्मोग, पेरॉक्सीएसीटिल नाइट्रेट, ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्सीडेस), उद्योगों से कार्बनिक यौगिक (एसिटिक एसिड, बेंजीन, ईथर), रेडियोएक्टिव पदार्थ (रेडियम, थोरियम), कुछ ठोस अपशिष्ट (राख, कचरा), आदि ।

प्रदूषण आधुनिक युग के औद्योगिक समाजों का सबसे बड़ा पार्श्व प्रभाव है जहां की औद्योगिक विकास और ग्रीन हाउस प्रभाव प्रतिकूल रूप से पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किया है। औद्योगीकरण की वजह से जीवन रक्षा प्रणाली तेजी से जीवन विनाशी प्रणाली में परिवर्तित हो रही है। मानव लोभ और कुछ भी करने की आज़ादी, गंभीर पतन और संसाधनों के कुप्रबंधन की ओर ले जा रही है|

प्रदूषण पर निबंध 5 (350 शब्द)

प्रदूषण सबसे गंभीर मुद्दा बन गया है और हर किसी को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सम्बंधि खतरों का सामना करना पड़ रहा है। औद्योगिक कचरे और अन्य गतिविधियों से उत्पन्न हुए विभिन्न प्रकार के प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनों जैसे की मिट्टी, हवा और पानी को दूषित कर रहे हैं| हवा, पानी, मिट्टी में मिश्रित होने के बाद ये मानव जाति और जानवर प्रणाली को प्रभावित कर रहे है और स्वास्थ्य के लिए घातक बीमारियां उत्पन्न कर रहे हैं| ध्वनि प्रदूषण शरीर के सुनने की प्रणाली को प्रभावित करने के साथ ही स्मृति में बाधा पैदा कर रही है।

वाहनों के परिवहन की वजह से शहरों में प्रदूषण की दर गांवों की तुलना में अधिक है। वाहनो, फैक्टरियों और उद्योगो से निकलने वाले धुएं शहरों में स्वच्छ हवा को प्रभावित कर रहे है जो की सांस लेने के लिए उचित नहीं है| बड़े सीवेज सिस्टम से गन्दा पानी, घरों से अन्य कचरा, कारखानों और उद्योगों से उपोत्पाद, सीधे नदियों, झीलों और महासागरों को मिल रहें हैं। ज्यादातर ठोस अपशिष्ट, कचरा और अन्य अनोपयोगी वस्तु लोगो द्वारा भूमि पर फेंके जाते हैं जो की फसल उत्पादन को प्रभावित करते है। शहरों में अधिकांश लोग सिर्फ अपने छड़ीक खुशी के लिए जन्मदिन, विवाह या अन्य अवसरों के दौरान काफी हद तक शोर प्रदूषण फैलाते हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से शहरों में सभी सड़के दिन भर यातायात के पूर्ण होते जा रहे हैं जो की वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं।

अंततः मनुस्यो द्वारा बना प्रौद्योगिक उन्नति पृथ्वी पर सभी प्रकार के प्रदूषण का मुख्य कारण है। कोई और नहीं बल्कि मनुस्य खुद ही दुनिया भर में प्रदूषण रूपी एक गढ्ढा खोद रहा है और पृथ्वी पर रहने वाले जीवो के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर रहा है| जीवन की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है क्योकि प्रदुषण एक राक्षक की तरह काम कर रहा है और विभिन्न प्रकार के बीमारी जैसे की उच्च रक्तचाप, गुर्दा रोग, सांस की बीमारी, कैंसर, महामारी, त्वचा रोग, आदि का कारण है|


 

प्रदूषण पर निबंध 6 (450 शब्द)

प्रौद्योगिक उन्नति की आधुनिक दुनिया में, प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है जो की पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार हैं वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भू प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। सभी प्रकार के प्रदूषण निस्संदेह पूरे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं अतः जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। मनुष्य के मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर हमारी स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

वाहनो के बढ़ती संख्या की वजह से उत्पन्न हानिकारक और ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन, कारखाने और खुले में आग जलाना, वायु प्रदुषण के मुख्य कारण हैं। जीवन को बेहतर बनाने की भीड़ में, हर कोई अपने आसान दैनिक दिनचर्या के लिए अच्छी तरह से संसाधन चाहता है, लेकिन वे अपने प्राकृतिक परिवेश के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते। ज्यादातर वायु प्रदूषण रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन के द्वारा होता है। कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैसें है जो की वायु को प्रदूषित करती है और वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर रहीं हैं|

उत्पादक कारखानें भी लोगों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, वायु प्रदूषण के लिए बड़ा योगदान कर रहीं हैं। निर्माण प्रक्रिया के दौरान कारखानों के द्वारा कुछ विषाक्त गैसें, गर्मी और ऊर्जा रिलीज होती है। कुछ अन्य आदतें जैसे की खुले स्थान पे घरेलु कचरे को जलाना आदि भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहीं हैं| वायु प्रदूषण इंसान और जानवरों में फेफड़ों के कैंसर सहित अन्य सांस की बीमारियां उत्पन्न कर रहीं हैं|

जल प्रदूषण भी एक बड़ा मुद्दा है जो सीधे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि वे अपने उत्तरजीविता के लिए केवल पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर रहते हैं। धीरे-धीरे समुद्री जीवन का ग़ायब होना वास्तव में मनुष्य और जानवरों की आजीविका पर असर डालेगा। कारखानों, उद्योगो, सीवेज सिस्टम और खेतों आदि के हानिकारक कचरे का सीधे तौर पे नदियों, झीलों और महासागरों के पानी के मुख्य स्रोत में मिलाना ही जल को दूषित करने का कारण है। दूषित पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करता है।

उर्वरक, कवकनाशी, शाकनाशी, कीटनाशकों और अन्य कार्बनिक यौगिकों के उपयोग के कारण मृदा प्रदूषण होता है। यह परोक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योकि हम मिट्टी में उत्पादित खाद्य सामग्री खाते हैं। भारी मशीनरी, वाहन, रेडियो, टीवी, स्पीकर आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण के कारण है जो की सुनने की समस्याओ और कभी कभी बहरापन का कारण बनती हैं। हमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है जिससे की हम एक स्वस्थ्य और प्रदुषण मुक्त वातावरण पा सके।

 

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भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए. माता-पिता को प्रदुषण के प्रकार, कारण और रोकथाम के बारे में पता होना चाहिए ताकि वो अपने बच्चो को इसके बारे में बता सके. यहाँ निचे हमने प्रदुषण पर निबंध दिया है ( Essay On Pollution In Hindi ) जो आपके बच्चो के लिये सहायक साबित होंगा.

पर्यावरण प्रदुषण विषय पर निबंध / Essay On Pollution In Hindi

आओ दोस्तों कसम ये खाये, प्रदुषण को हम दूर भगाये…

प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना. वर्तमान में हम खतरनाक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं. और यह समस्या भविष्य में हमारे लिये जानलेवा भी हो सकती है. इस भयंकर सामाजिक समस्या का मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण वनों की कटाई और शहरीकरण प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उत्पाद जो की सामान्य जीवन की दैनिक जरूरतों के रूप इस्तेमाल की जाती है. रास्तो पर गाडियों का ज्यादा उपयोग होने से पेट्रोल और डीजल का भी ज्यादा से ज्यादा अपव्यय होगा और गाडियों से निकलने वाले धुए से वायु प्रदुषण होता है.

पर्यावरण प्रदुषण / Pollution में सभी हानिकारक प्रदूषक हमारे स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव डालते है. प्रदुषण के बहोत से प्रकार होते है जिनमे मुख्य रूप से जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण, भू प्रदुषण और ध्वनि प्रदुषण शामिल है. उद्योगों में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है और इस प्रक्रिया में केमिकल, विषैले पदार्थ और गैस का उपयोग किया जाता है जो मानवी स्वास्थ के लिये हानिकारक होते है. इससे प्रकृति में विभिन्न प्रकार की समस्याये उत्पन्न होती है जैसे की ग्लोबल वार्मिंग / Global Warming, जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण / Air Pollutionइत्यादि. पिछले एक दशक में प्राकृतिक प्रदूषक का स्तर बहोत बढ़ा है. सभी प्रकार के प्रदूषण बेशक पूरे पर्यावरण और इकोसिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं मतलब जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं. मनुष्य की मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है. प्रदूषण सबसे गंभीर मुद्दा बन गया है और हर किसी को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सम्बंधि बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है.

इस पुरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहा जिंदगी के सभी संसाधन उपलब्ध है. इस ग्रह ने हमें जिंदगी दी और हमने इस ग्रह को प्रदूषित किया. इस से तो बेहतर है की हम इस ग्रह को बदलने की कोशिश ही न करे. हम दशको से पृथ्वी को प्रदूषित कर रहे है. हम सभी इसी ग्रह पर रहते है इसीलिये हमारी यह जवाबदारी है की हम इसे स्वस्थ और प्रदुषणरहित रखे. लेकिन हम अपने दैनिक कामो को चलते इतने व्यस्त हो गये की हम हमारी जिम्मेदारियों को ही भूल गये. साफ़ पानी और शुद्ध हवा हमारी स्वस्थ जिंदगी के लिये बहोत जरुरी है. लेकिन आज के आधुनिक युग में इन दो में से एक भी संसाधन साफ़ और शुद्ध नही. अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले सालो में इस ग्रह पर कोई जिंदगी नही रहेगी.

पृथ्वी पर सभी प्राकृतिक गैसो का संतुलन बने रहना बहोत जरुरी है. और ये संतुलन पदों से ही बना रहता है लेकिन हम अपने स्वार्थ के लिये पेड़ो को काट रहे है. जरा सोचिये की यदि इस ग्रह पर पेड़ ही न रहे तो क्या होगा, पेड़ हमारे द्वारा छोड़ी गयी गैस कार्बोन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते है और ओक्सिज़न को छोड़ते है. यदि पेड़ इस दुनिया में नही होंगे तो वातावरण में कार्बोन डाइऑक्साइड का प्रमाण बढ़ जायेगा, और इससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ जायेगा. प्राकृतिक संसाधनों के साथ छेड़-छाड़ करने से प्राकृतिक आपदाये भी आ सकती है. आज के आधुनिक युग में हमने औद्योगिक विकास तो कर ही लिया है लेकिन प्राकृतिक विकास हम नही कर पाये. हम औद्योगिक विकास करने के चक्कर में हमारी प्रकृति को ही भूल गये. और इसी वजह से आज दुनिया में अलग-अलग तरह की बीमारिया उत्पन्न हो रही है. औद्योगीकरण की वजह से जीवन रक्षा प्रणाली तेजी से जीवन विनाशी प्रणाली में परिवर्तित हो रही है.

प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर नजर आते हैं. प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं. प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं. गंदा जल, जल में रहने वाले जीवों के लिये भी बहुत हानिकारक होता है. ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव उत्पन्न करता है. इससे बहरापन, चिंता, अशांति जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है.

आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना टेढ़ी खीर हो गई है. अनेक प्रकार के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास अब तक नाकाम सिद्ध हुए हैं. हरेक को ये सोचना चाहिये कि वे आस-पास कूड़े का ढ़ेर व गंदगी इकट्ठा न होने दें. जलाशयों में प्रदूषित जल का शुद्धिकरण होना चाहिये. कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग घटाकर सौर-ऊर्जा, सी.एन.जी., पवन-ऊर्जा, बायो गैस, एल.पी.जी., जल-विद्युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिये. इन सभी उपायों को अपनाने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण को घटाने में काफी मदद मिलेगी.

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिये कुछ ठोस एवं सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है. रेडियो, टीवी, ध्वनि विस्तारक यंत्रों आदि को कम आवाज में बजाना चाहिये. लाउडस्पीकरों के आम उपयोग को प्रतिबंधित कर देना चाहिये. वाहनों में हल्के आवाज करने वाले ध्वनि-संकेतकों का प्रयोग करना चाहिये. घरेलू उपकरणों को इस तरह प्रयोग में लाना चाहिये जिससे कम से कम ध्वनि उत्पन्न हो.

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है. प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है. सामुहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहोत ज्यादा भुगतेगी.

आज हम अच्छी चीजो में पैसे खर्च करने की बजाये पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली चीजो में पैसे खर्च करने लगे है. प्रदुषण से होने वाली बीमारियों से बचने के लिये हमें प्रदुषण रहित पानी पीना चाहिये, स्वस्थ भोजन करना चाहिये, सुबह की ताज़ी हवा लेनी चाहिये और कभी भी ध्वनि प्रदुषण नही करना चाहिये. हम में से आजकल ज्यादातर लोग फल, हरी सब्जिया खरीदने में पैसे खर्च करने की बजाये दवाइया लेने में पैसे खर्च करने लगे है. हमेशा याद रखे, जबतक हम स्वयं प्रदुषण की रोकथाम के लिये कोई कदम नही उठाते तबतक हम इस समस्या को दूर नही कर सकते.

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